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Tuesday, August 20, 2013

विवादित स्थलों की यथास्थिति बनाये रखने की परंपरा भारत के सांस्कृतिक भविष्य के लिए घातक

विवादित स्थलों की यथास्थिति बनाये रखने की परंपरा भारत के सांस्कृतिक भविष्य के लिए काफी घातक सिद्ध होगी. मुख्यतः इन स्थलों का मुख्य विवाद यह होता है की सर्वप्रथम यह स्थल अमुक का था जिसपर बाद में अमुक ने निर्माण / कब्ज़ा किया. जिन विवादित स्थलों पर दोनों समुदाय अब तक सर्वमान्य हल नहीं निकाल पाए है सरकार एवं कोर्ट को तुरंत हस्तक्षेप कर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया के साथ किसी अन्य विदेशी मान्यता प्राप्त संसथान से वैज्ञानिक अध्यन करवाकर यह सपष्ट ज्ञात करवाना चाहिए कि निर्माण काल के हिसाब से सर्वप्रथम वह विवादित स्थल किस समुदाय से सम्बंधित था तथा यह ज्ञात होने पर विवादित स्थल को सच्चाई व निडरता के साथ उस समुदाय को दे देनी चाहिए.. इससे थोड़े समय के लिए किसी को दुःख हो सकता है परंतू भविष्य में सब सामान्य हो जायेगा. जबकि यथास्थिति बनाये रखने से लगातार कटुता एवं वैमनस्य का जहर बढ़ता जायेगा जो की भविष्य में भी हिंदुस्तान के भविष्य के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है.

1 comment:

  1. बिल्कुल स्पष्ट निर्णय होना चाहिये.

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